बदलते दौर में तेजी से समाप्त हो रहा देशी चारपाई का अस्तित्व
आधुनिकता की अंधी दौड़ बदलते दौर में अब सदियों से चली आ रही घरों में देशी खाट (चारपाई) का आस्तित्व अब धीरे धीरे तेजी से कम होता जा रहा है अब लोग बाजारों से रेडिमेट आर्टिफिशियल आधुनिक बेड चारपाई आदि की सामग्री ज्यादा खरीद रहे है जिसके चलते पुराना कल्चर खत्म होता जा रहा है।ग्रामीण बुजुर्ग ने बुंदेली प्रकाश न्यूज से बात करते हुए बताया की देशी चारपाई के लिए हम लोग खेतो से कांसा लाते थे फिर उसको तैयार कर बद्ध बनाते थे उसी से चारपाई , बैलों की रस्सी,घड़े के नीचे रखने के लिए तथा बैठने के लिए मचिया बनाते थे।आज मोटा अनाज केमिकल युक्त खाद के चलते नही हो रहा और न ही अब कांसा मिलता तो इसी के चलते लोग लड़की की सामग्री बाजार से खरीद कर इस्तेमाल में लेते है।जबकि देशी चारपाई के बहुत सारे फायदे होते है कई बिमारिया ठीक हो जाती है।